7080 GI/2024 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY संचार मंत्रालय (दूरसंचार जिभाग) अजधसूचना नई ददल्ली, 29 अक् तूबर, 2024 सा. का. जन.675(अ).—दूरसंचा…
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भारत का राजपत्र The Gazette of India
सी.जी.-डी.एल.-अ.-01112024-258404 CG-DL-E-01112024-258404
असाधारण EXTRAORDINARY
भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i)
प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 617] नई दिल्ली, बुधवार, अक्टूबर 30, 2024/ कार्तिक 8, 1946 No. 617] NEW DELHI, WEDNESDAY, OCTOBER 30, 2024/KARTIKA 8, 1946
संचार मंत्रालय (दूरसंचार विभाग)
अधिसूचना
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर, 2024
सा. का. नि.675(अ).—दूरसंचार (एमेचर स्टेशन प्रचालक) नियम, 2024 का प्रारूप, जिसे केंद्रीय सरकार दूरसंचार अधिनियम, 2023 (2023 का 44) की धारा 56 की उप-धारा (2) के खंड (यझ) के साथ पठित धारा 47 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बनाने का प्रस्ताव करती है, को उक्त अधिनियम की धारा 56 की उप-धारा (1), की अपेक्षानुसार, भारत सरकार के संचार मंत्रालय, दूरसंचार विभाग की अधिसूचना संख्या सा.का.नि. 447(अ), तारीख 24 जुलाई, 2024 द्वारा भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग 2, खंड 3, उप-खंड (i), तारीख 24 जुलाई, 2024 में प्रकाशित किया गया था, जिसमें इससे प्रभावित होने वाले व्यक्तियों से उक्त अधिसूचना वाले राजपत्र की प्रतियां जनसाधारण को उपलब्ध कराए जाने की तारीख से तीस दिन की अवधि के अवसान से पूर्व आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए थे;
और उक्त राजपत्र की प्रतियां तारीख 25 जुलाई, 2024 को जनसाधारण को उपलब्ध करा दी गई थीं;
और केंद्रीय सरकार द्वारा उक्त प्रारूप नियमों के संबंध में जनसाधारण से प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर सम्यक रूप से विचार कर लिया गया है;
अतः अब केंद्रीय सरकार, दूरसंचार अधिनियम, 2023 (2023 का 44) की धारा 56 की उप-धारा (2) के खंड (यझ), के साथ पठित धारा 47 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और भारतीय बेतार टेलेग्राफ्स (एमेचर सेवा) नियम, 1978 को, उन बातों के सिवाय अधिक्रांत करते हुए, जिन्हें ऐसे अधिक्रमण से पूर्व किया गया है या करने का लोप किया गया है और उन नियमों के अधीन विद्यमान व्यवस्थाओं के निबंधन और शर्तों को अध्यारोहित किए बिना, जो ऐसी व्यवस्थाओं के अवसान की तारीख तक लागू रहेंगी, निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात:-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ — (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम दूरसंचार (एमेचर सेवा) नियम, 2024 है।
(2) ये राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
2. परिभाषाएं — (1) इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) “अधिनियम” से दूरसंचार अधिनियम, 2023 (2023 का 44) अभिप्रेत है;
(ख) “एमेचर रेडियो उपस्कर” से एमेचर स्टेशन के प्रचालन के लिए अपेक्षित रेडियो उपस्कर अभिप्रेत है;
(ग) “एमेचर सेवाएं” से स्व-प्रशिक्षण, अंतरसंचार और तकनीकी अन्वेषण के प्रयोजन के लिए रेडियो संचार सेवाएं अभिप्रेत है जो कि रेडियो तकनीक में रुचि रखने वाले सम्यक रूप से प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा केवल व्यक्तिगत उद्देश्य से और बिना किसी धनीय हित के हो;
(घ) “एमेचर स्टेशन” से एमेचर सेवाओं के लिए किसी एमेचर द्वारा प्रचालित रेडियो स्टेशन अभिप्रेत है;
(ङ) “एमेचर स्टेशन प्रचालक प्रमाण-पत्र” या “एएसओसी” से नियम 3 के उप-नियम (2) के अधीन यथा विनिर्दिष्ट एएसओसी (साधारण) और एएसओसी (प्रतिषिद्ध) अभिप्रेत है और “एएसओसी धारक” से वह व्यक्ति जिसे नियम 6 के उप-नियम (1) के अधीन ऐसा प्रमाण-पत्र अनुदत्त किया गया है, अभिप्रेत है;
(च) "अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार अभिसमय" से 1992 में जिनेवा में हस्ताक्षरित अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ अभिसमय या तत्पश्चात किया गया कोई पुनरीक्षण या उपांतरण अभिप्रेत है, जिसे भारत सरकार ने अनुसमर्थित या स्वीकृत किया है;
(छ) "पोर्टल" से केंद्रीय सरकार द्वारा इन नियमों के नियम के 15 के अधीन अधिसूचित किए जाने वाला पोर्टल अभिप्रेत है; और
(ज) "रेडियो विनियम" से विश्व रेडियो संचार सम्मेलन (जिनेवा 1995) द्वारा अंगीकृत किए गए विनियम अभिप्रेत है और उसमें किया गया प्रत्येक पुनरीक्षण या उपांतरण शामिल है, जिसे भारत सरकार ने अनुसमर्थित या स्वीकृत किया है;
(2) उन शब्दों और अभिव्यक्तियों, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु अधिनियम में परिभाषित हैं, के वही अर्थ होंगे जो उनके उस अधिनियम में है।
3. कार्यक्षेत्र — (1) कोई भी व्यक्ति, इन नियमों के अधीन अनुदत्त एएसओसी के निबंधन और शर्तों के अनुसरण में या अधीन के सिवाय एमेचर स्टेशन स्थापित या प्रचालित नहीं करेगा।
(2) एएसओसी की निम्नलिखित दो प्रवर्ग होंगे, जिन्हें केंद्रीय सरकार नियम 6 के उप-नियम (1) के अधीन अनुदत्त कर सकेगी, अर्थात:
(क) एमेचर स्टेशन प्रचालक प्रमाण-पत्र (साधारण), या एएसओसी (साधारण); और
(ख) एमेचर स्टेशन प्रचालक प्रमाण-पत्र (प्रतिषिद्ध), या एएसओसी (प्रतिषिद्ध)।
4. एमेचर स्टेशन प्रचालक प्रमाण-पत्र अभिप्राप्त करने के लिए पात्रता शर्तें — (1) नियम 6 के उप-नियम (1) के अधीन यथास्थिति, एएसओसी (साधारण) या एएसओसी (प्रतिषिद्ध), उस व्यक्ति को अनुदत्त किया जाएगा जो भारत का नागरिक है, जो :
(क) बारह वर्ष से कम आयु का नहीं हो; और
(ख) जिसने एएसओसी अनुदत्त करने के लिए नियम 5 के अधीन विनिर्दिष्ट परीक्षा उत्तीर्ण की हो।
परन्तु यह कि केंद्रीय सरकार प्रशासनिक अनुमति और समय-समय पर विनिर्दिष्ट ऐसे निबंधन और शर्तों के अधीन रहते हुए, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो भारत का नागरिक नहीं है, एएसओसी अनुदत्त करने पर विचार करने के लिए नियम 5 के अधीन परीक्षा देने की अनुमति दे सकती है या उपनियम (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उसे प्रमाण-पत्र अनुदत्त कर सकती है।
(2) केंद्रीय सरकार, विदेश मंत्रालय की निबंधन तथा शर्तों और प्रशासनिक अनुमति के अधीन रहते हुए, किसी भी व्यक्ति को, जो भारत का नागरिक नहीं है, तथा जिसके पास उस देश के सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र है, जो नियम 6 के अधीन अनुदत्त प्रमाण-पत्र के समान है, इन नियमों के अधीन एएसओसी प्रमाण-पत्र अनुदत्त करने के लिए, इस प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट प्रारूप में, एक हजार रुपए के फीस के साथ पोर्टल पर आवेदन करने की अनुज्ञा दे सकती है।
(3) केंद्रीय सरकार ऐसे राष्ट्रों की सूची विनिर्दिष्ट करेगी जिनके द्वारा अनुदत्त प्रमाण-पत्रों पर उप-नियम (2) के अधीन एएसओसी अनुदत्त करने के लिए विचार किया जाएगा।
5. एमेचर स्टेशन प्रचालक परीक्षा — (1) नियम 4 के अधीन घोषित यथा लागू पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाला कोई भी व्यक्ति एएसओसी अभिप्राप्त करने हेतु एमेचर स्टेशन प्रचालक की परीक्षा में शामिल होने के लिए केंद्रीय सरकार को, इस प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट प्ररूप में पोर्टल पर ऐसी परीक्षा की तारीख से एक मास पहले आवेदन कर सकता है।
(2) उप-नियम (1) के अधीन किसी भी आवेदन के साथ एक सौ रुपये का परीक्षा फीस देना होगा।
(3) केंद्रीय सरकार किसी भी प्रवर्ग में एएसओसी अभिप्राप्त करने के लिए परीक्षा का पाठ्यक्रम, स्थान, रीति, तारीख और समय प्रकाशित करेगी, जैसा कि नियम 3 के उप-नियम (2) के अधीन विनिर्दिष्ट है, जिसमें ऐसी परीक्षा के परिणामों की घोषणा की तारीख भी शामिल होगी।
(4) ऐसी परीक्षा की भाषा अंग्रेजी होगी, तथा एएसओसी (साधारण) के लिए परीक्षा में केंद्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट मोर्स कोड में प्रवीणता भी अपेक्षित होगी।
(5) इस नियम के अधीन परीक्षा में सफलतापूर्वक उत्तीर्ण होने के लिए एएसओसी के प्रत्येक प्रवर्ग में कुल अंकों का न्यूनतम चालीस प्रतिशत लाना अपेक्षित है।
6. एमेचर स्टेशन प्रचालक प्रमाण पत्र का अनुदत्त तथा विधिमान्यता - (1) केंद्रीय सरकार, नियम 5 के अधीन परीक्षा के सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर एमेचर स्टेशन प्रचालकों के लिए नीचे यथा विनिर्दिष्ट फीस के संदाय के अध्यधीन रहते हुए, अनन्य कॉल साइन के साथ निम्नलिखित प्रवर्गों के प्रमाण पत्र जारी कर सकेगी:
| प्रमाण पत्र के प्रवर्ग | फीस |
|---|---|
| एएसओसी (साधारण) | (i) बीस वर्ष की विधिमान्य अवधि के लिए एक हजार रुपये; |
| एएसओसी (प्रतिषिद्ध) | (ii) आजीवन विधिमान्य के लिए दो हजार रुपये। |
स्पष्टीकरण - इस उप-नियम के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति "आजीवन" से एएसओसी धारक के अस्सी वर्ष की आयु प्राप्त करने तक अभिप्रेत है।
(2) आवेदक द्वारा परीक्षा सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर, किसी भी प्रवर्ग के एएसओसी के अनुदत्त के लिए संदाय, नियम 5 के अधीन परीक्षा के परिणाम की घोषणा की तारीख से दो वर्ष की अवधि के भीतर किया जाएगा, जिसके न हो सकने पर ऐसे आवेदक को कोई प्रमाण पत्र अनुदत्त नहीं किया जाएगा:
परन्तु यह कि ऐसा आवेदक, जो एएसओसी अनुदत्त के लिए अपात्र हो जाता है, उस प्रमाण पत्र के अनुदत्त के लिए नियम 5 में निर्दिष्ट परीक्षा में पुनः उपस्थित होने के लिए आवेदन कर सकेगा।
(3) नियम 4 के उप-नियम (2) के अधीन एएसओसी अनुदत्त करने के लिए आवेदनों के संबंध में, केंद्रीय सरकार ऐसे आवेदनों पर विचार करने के पश्चात, ऐसे व्यक्ति के वीजा की अवधि के साथ सहविस्तारी अवधि के लिए या बारह महीने की अवधि के लिए, जो भी कम हो, एएसओसी अनुदत्त कर सकती है।
7. एमेचर स्टेशन प्रचालक के लिए लागू साधारण शर्तें - (1) एएसओसी धारक फ्रीक्वेंसी बैंड और एमिशन पर एमेचर स्टेशनों का प्रचालन करेगा और एएसओसी के प्रत्येक प्रवर्ग के संबंध में केंद्रीय सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट पावर पारेषित करेगा और एएसओसी (साधारण) के धारक को जैसा कि उसके एएसओसी में विनिर्दिष्ट किया जाए, एएसओसी (प्रतिषिद्ध) के धारक की तुलना में अधिक एमिशन टाइप और उच्च पावर के उपयोग की अनुज्ञा दी जाएगी।
(2) प्रत्येक एमेचर स्टेशन को एएसओसी में विनिर्दिष्ट स्थान पर निम्नानुसार स्थापित और प्रचालित किया जाएगा,-
(क) यथा लागू, अधिनियम के उपबंध और उसके अधीन बनाए गए नियम;
(ख) इन नियमों के उपाबंध क में विनिर्दिष्ट निबंधन और शर्तें; और
(ग) अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार अभिसमय या रेडियो विनियमों के उपबंध।
(3) एएसओसी धारक को एमेचर रेडियो उपस्कर के आयात के लिए एक पृथक प्राधिकार की अपेक्षा नहीं होगी।
(4) केंद्रीय सरकार किसी भी समय एएसओसी धारक को लिखित रूप में विनिर्दिष्ट नोटिस द्वारा या उस नोटिस को पोर्टल पर अपलोड करने के द्वारा, एएसओसी की किसी भी शर्त को उपांतरित, परिवर्तित, रद्द या वापस कर सकती है।
(5) एएसओसी धारक, एएसओसी की शर्तों में किसी भी परिवर्तन को प्रभावी करने के लिए किसी भी व्यय का दावा नहीं करेगा, जैसा केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए।
(6) एएसओसी धारक, एक हजार रुपये की फीस के संदाय पर अपने एएसओसी की एक अनुलिपि जारी करने या एमेचर स्टेशन के स्थान को बदलने के लिए आवेदन कर सकता है।
(7) एएसओसी धारक, प्राकृतिक विपदा और आपदाओं के दौरान केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत किसी अधिकारी के अनुरोध पर बिना किसी फीस या प्रभार के एमेचर सेवा फ्रीक्वेंसी बैंड में रेडियो संचार सेवाएं प्रदान करेगा।
(8) एएसओसी धारक को भारत में रजिस्ट्रीकृत पोत पर एमेचर स्टेशन स्थापित करने और प्रचालित करने के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा इस प्रयोजन हेतु पोर्टल पर विनिर्दिष्ट प्ररूप में एक विनिर्दिष्ट अनुरोध करने के पश्चात अनुज्ञा दी जा सकती है।
8. एमेचर स्टेशन प्रचालक प्रमाण पत्र का नवीनीकरण- (1) एएसओसी धारक नियम 6 के उप-नियम (1) में विनिर्दिष्ट फीस के संदाय के साथ इस प्रयोजन के लिए पोर्टल पर विनिर्दिष्ट प्ररूप में इस ऐसे प्रमाण पत्र के अवसान की तारीख से कम से कम बारह मास पहले आवेदन जमा करके अपने एएसओसी के नवीनीकरण के लिए आवेदन कर सकता है।
परन्तु यह कि ऐसी समय अवधि के अवसान के पश्चात और ऐसे अवसान की तारीख के दो वर्ष पश्चात तक नवीनीकरण के लिए कोई आवेदन करना हो तो एक हजार रुपये के विलंब फीस के संदाय पर आवेदन किया जा सकता है;
परन्तु यह भी कि नवीनीकरण के लिए एएसओसी के अवसान की तारीख से दो वर्ष के पश्चात प्राप्त होने वाले किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।
(2) आजीवन प्रमाण पत्र की विधिमान्यता वाले एएसओसी को इस प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट प्ररूप में एएसओसी धारक द्वारा किए गए विनिर्दिष्ट अनुरोध पर बिना किसी अतिरिक्त फीस के एक बार में दस वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है।
9. एएसओसी का निलंबन या रद्दकरण – केंद्रीय सरकार किसी एएसओसी को निलंबित या रद्द कर सकती है यदि यह राय है कि, एएसओसी धारक:
(क) इन नियमों के अधीन अनुदत्त एएसओसी के निबंधनों और शर्तों या रेडियो उपस्कर के प्रचालन के संबंध में लागू नियमों या अधिनियम के किसी अन्य उपबंध का पालन करने में विफल रहा है; या
(ख) अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार अभिसमय या रेडियो विनियमों के लागू उपबंधों का पालन करने में विफल रहा है, या
(ग) जानबूझकर केंद्रीय सरकार को गलत या असत्य सूचना प्रस्तुत की है।
परन्तु यह कि इस नियम के अधीन निलंबन या रद्दकरण का कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि एएसओसी धारक को ऐसे निलंबन या रद्दकरण के विरुद्ध अभ्यावेदन देने या सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर नहीं दे दिया गया हो।
10. फीस का प्रतिदाय नहीं - किसी भी कारण से एएसओसी के निलंबन या रद्दकरण या एएसओसी के निबंधनों और शर्तों के किसी भी उपांतरण, परिवर्तन, रद्दकरण या वापसी के परिणामस्वरूप कोई प्रतिकर या प्रतिदाय लागू नहीं होगा।
11. एएसओसी का अंतरण या अभ्यर्पण- (1) एएसओसी गैर-अंतरणीय है।
(2) एएसओसी धारक को किसी भी समय पर ऐसे एएसओसी का अभ्यर्पण करने की अनुज्ञा होगी, परंतु यह कि ऐसे अभ्यर्पण के लिए फीस का प्रतिदाय अनुदत्त नहीं किया जाएगा।
12. एमेचर सोसायटी की क्रियाकलापों के लिए एएसओसी का उपयोग-(1) कम से कम चार एएसओसी धारकों का एक समूह एमेचर स्टेशन की स्थापना और प्रचालन के प्रयोजन के लिए एमेचर सोसायटी बनाने के लिए इस प्रयोजन हेतु पोर्टल पर विनिर्दिष्ट प्ररूप में आवेदन तथा दो हजार रुपये के फीस का संदाय कर सकता है।
(2) उप-नियम (1) के अधीन आवेदन में एएसओसी धारकों में से एक आवेदक को प्रस्तावित एमेचर सोसायटी के अभिरक्षक के रूप में विनिर्दिष्ट किया जाएगा और ऐसी सोसायटी के भीतर ऐसी एमेचर सोसायटी की अभिरक्षता को परिवर्तित कर किसी अन्य एएसओसी धारक को दिए जाने की सूचना इस प्रयोजन के लिए पोर्टल पर विनिर्दिष्ट प्ररूप में ऐसे परिवर्तन के तीस दिन की अवधि के भीतर केंद्रीय सरकार को दी जाएगी।
(3) उप-नियम (1) के अधीन आवेदन प्राप्त होने पर, केंद्रीय सरकार एमेचर सोसायटी के लिए एक विशिष्ट कॉल साइन के साथ, निबंधन और शर्तों के अधीन जैसा विनिर्दिष्ट किया जाए अनुज्ञा दे सकती है, जो बीस वर्ष की अवधि के लिए विधिमान्य होगी या ऐसी एमेचर सोसायटी के अभिरक्षक के एएसओसी की विधिमान्यता, जो भी कम हो, के साथ सहविस्तारी होगी।
(4) यदि उप-नियम (1) के अधीन आवेदक में से कोई भी एमेचर सोसायटी छोड़ता है, तो उसके द्वारा ऐसी सोसायटी को छोड़ने से तीस दिनों के भीतर इस प्रयोजन के लिए पोर्टल पर निर्दिष्ट प्ररूप में केंद्रीय सरकार को संसूचित किया जाएगा।
(5) इस नियम के अधीन दी गई अनुज्ञा तब तक विधिमान्य बनी रहेगी जब तक कि उप-नियम (1) के अधीन आवेदक एएसओसी धारकों में से कम से कम चार एमेचर सोसायटी के सदस्य बने रहते हैं।
13. विनिर्दिष्ट आयोजनों के लिए विशेष कॉल साइन जारी करना - (1) केंद्रीय सरकार, पोर्टल पर इस प्रयोजन के लिए यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में आवेदन प्राप्त होने और दो सौ रुपये की फीस का संदाय करने पर एएसओसी धारकों और नियम 12 के तहत गठित एमेचर सोसाइटियों को किसी विशिष्ट आयोजन के लिए एक विशेष कॉल साइन समनुदेशित कर सकती है।
(2) उप-नियम (1) में निर्दिष्ट आवेदन, विशिष्ट आयोजन से कम से कम नब्बे दिन पहले प्रस्तुत किया जा सकता है।
(3) उप-नियम (1) के अधीन एक विशेष कॉल साइन विनिर्दिष्ट आयोजन के प्रारंभ होने की तारीख से नब्बे दिनों की अवधि तक विधिमान्य होगा।
परन्तु यह कि यदि विनिर्दिष्ट आयोजन उक्त नब्बे दिनों की अवधि से आगे बढ़ाया जाता है, तो एएसओसी धारक या एमेचर सोसायटी उप-नियम (1) के अधीन विशेष कॉल साइन के लिए नए आवेदन कर सकते हैं।
14. अभिलेखों का निरीक्षण और सूचना मांगना - प्रत्येक एएसओसी धारक का यह कर्तव्य होगा कि वह निरीक्षण के लिए अभिलेखों के साथ साथ एमेचर रेडियो-उपस्कर प्रस्तुत करे और उसके संबंध में केंद्रीय सरकार द्वारा इस प्रयोजन हेतु प्राधिकृत अधिकारी द्वारा अपेक्षित कोई अन्य सूचना प्रदान कर सके।
15. इन नियमों का डिजिटल कार्यान्वयन - केंद्रीय सरकार, अधिनियम की धारा 53 को आगे बढ़ाते हुए, आवेदन प्रस्तुत करने, पाठ्यक्रम, परीक्षा का स्थान, रीति, तारीख और समय का प्रकाशन, परीक्षाओं के परिणामों की घोषणा और इन नियमों के अधीन यथा विनिर्दिष्ट एएसओसी और अन्य अनुज्ञाएं प्रदान करने सहित इन नियमों के डिजिटल कार्यान्वयन के लिए एक पोर्टल अधिसूचित करेगी।
उपाबंध क (नियम 7(2)(ख) देखिए)
एमेचर स्टेशन की स्थापना और प्रचालन के लिए निबंधन और शर्तें
एमेचर स्टेशन का उपयोग- एमेचर स्टेशन का उपयोग, प्राधिकृत फ्रीक्वेंसी बैंड के भीतर एमेचर स्टेशन के प्रचालन को सुकर बनाने के लिए मानक फ्रीक्वेंसी और टाइम सिग्नल सर्विस में पारेषण को प्राप्त करने के प्रयोजन के लिए उपयोग में लिया जा सकता है।
संदेश -(1) (क) रेडियो संचार का आदान-प्रदान अन्य प्राधिकृत एमेचर स्टेशनों के साथ किया जा सकता है। एमेचर स्टेशन उन देशों के एमेचर स्टेशनों के साथ संचार नहीं करेंगे जिनके प्रशासन ने ऐसे रेडियो संचार पर अपनी आपत्ति के बारे में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार अभिसमय को अधिसूचित किया है।
(ख) पारेषण सरल भाषा में किया जाएगा तथा तकनीकी प्रकृति के संदेशों तक सीमित होगा।
(2) प्राधिकृत अस्तित्व निम्नलिखित संदेश पारेषित नहीं करेगी:
ब्रॉडकास्ट कार्यक्रमों (क), टेप रिकॉर्डिंग या मनोरंजन के साधन या संगीत के पारेषण का पुनःउत्पादन;
(ख) झूठे या भ्रामक कॉल, सिग्नल्स, समाचार, विज्ञापन, कारबार की संसूचानाएं, राजनीतिक या औद्योगिक विवाद के विषयों पर कथन, या तीसरे पक्ष के संदेश; या
(ग) अभद्र, अश्लील, आपत्तिजनक भाषा या संकेतों का उपयोग।
(3) सामान्य दूरसंचार सुविधाओं की विफलता की दशा में एएसओसी धारक को केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं से संबंधित थर्ड पार्टी के संदेशों को संभालने की अनुज्ञा दी जा सकती है, जो सक्षम सिविल प्राधिकारी अर्थात जिला मजिस्ट्रेट या उपायुक्त या जिला कलेक्टर या उनके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा दिए गए हों और संबंधित हैं।
फ्रीक्वेंसी, उत्सर्जन और पॉवर - एमेचर स्टेशन का प्रचालन उन फ्रीक्वेंसी पर किया जाएगा जो संबंधित प्रवर्ग के प्रमाण पत्र के लिए प्राधिकृत फ्रीक्वेंसी बैंड के भीतर हैं और उत्सर्जन और पॉवर की ऐसी प्रवर्ग पर है जो कि केंद्रीय सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट है।
फ्रीक्वेंसी नियंत्रण और माप-(1) ट्रांसमिटिंग साधित्र को यथा संभव सटीक रूप से ट्यून किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्राधिकृत फ्रीक्वेंसी बैंड की सीमाओं के बाहर किसी भी फ्रीक्वेंसी पर किसी ऊर्जा का विकिरण ना हो।
(2) एएसओसी धारक के पास प्राधिकृत एमेचर स्टेशन पर फ्रीक्वेंसी को मापने वाला एक विश्वसनीय उपस्कर होगा ताकि प्रत्येक बार ट्रांसमीटर की फ्रीक्वेंसी बदलने पर और जब भी यह जांचना आवश्यक हो कि ट्रांसमिटेड फ्रीक्वेंसी में उत्सर्जन प्राधिकृत फ्रीक्वेंसी बैंड के भीतर है को सत्यापित किया जा सके। एएसओसी धारक फ्रीक्वेंसी मापने वाले उपस्कर की सटीकता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
(3) एमेचर स्टेशन के लिए यथा लागू फ्रीक्वेंसी आंटन हेतु स्थायी सलाहकारी समिति (एसएसीएफए) की अनुमति अपेक्षित होगी।
(2) स्टेशन द्वारा हस्तक्षेप किए जाने की स्थिति में एएसओसी धारक केंद्रीय सरकार या किसी लैंड स्टेशन के अनुरोध पर उपस्कर के लंबित समायोजन तक पारेषण को बंद कर देगा या प्रतिबंधित कर देगा।
(3) एएसओसी धारक केंद्रीय सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट ऐसे उत्सर्जन का (डैम्प्ड वेव) उपयोग नहीं करेगा।
(क) प्रत्येक पारेषण की तारीख और समय;
(ख) आदान-प्रदान किए गए संचार का सार;
(ग) किए गए प्रयोगों और परीक्षणों का संक्षिप्त विवरण;
(घ) उन स्टेशनों या स्टेशनों का कॉल साइन, जिनके साथ संदेशों का आदान-प्रदान किया गया है प्रत्येक मामले में किए गए पारेषण का समय और प्रकार;
(ङ) एमेचर स्टेशन के खुलने और बंद होने का समय; और
(च) पोर्टेबल या मोबाइल एमेचर स्टेशन की दशा में अस्थायी स्थान की विशिष्टियां।
(2) लॉग में सभी समय भारतीय मानक समय में लिखे जाएंगे।
(3) लॉग में प्रविष्टियों के बीच कोई स्थान नहीं छोड़ा जाएगा और उन्हें प्राप्ति और पारेषण के समय तैयार और दर्ज किया जाएगा।
(4) एएसओसी धारक लॉग को नष्ट करने से पहले उसमें अंतिम प्रविष्टि की तारीख से एक वर्ष की अवधि के लिए संरक्षित रखेगा:
परन्तु कि किसी भी लॉग को ऐसी अतिरिक्त अवधि के लिए नष्ट नहीं किया जाएगा जैसा कि केंद्रीय सरकार निर्देशित करे।
(2) एएसओसी धारक द्वारा उपयोग किए जाने वाले या उपयोग किए जाने के लिए आश्रित एमेचर रेडियो उपस्कर और अन्य उपसाधन इस तरह से सुव्यवस्थित किए जाएंगे ताकि किसी व्यक्ति की सुरक्षा को खतरा न हो और या किसी भी सेवा में / बाधा न आए।
(3) इन एमेचर रेडियो उपस्कर को सुरक्षित स्थिति में और ऐसी रीति रखा जाएगा जिससे कि अनाधिकृत व्यक्तियों की उस तक पहुंच न हो।
(4) प्रत्येक एएसओसी धारक को उसके द्वारा उपयोग किए जाने वाले एमेचर रेडियो उपस्कर का अभिलेख नीचे विनिर्दिष्ट प्ररूप के अनुसार रखना होगा:
| क्र. सं. | उपस्कर की विशिष्टियां | जिस व्यक्ति से प्राप्त किया गया है उसका नाम और पता (यदि प्राधिकृत संस्था द्वारा असेम्बल किया गया हो तो स्वनिर्मित लिखें) | प्राप्ति या असेम्बल की तारीख |
|---|---|---|---|
| मेक | मॉडल और टाइप | क्रम सं. | |
| (1) | (2) | (3) | (4) |
| क्रय की दशा में रसीद संख्या दें और विक्रेता का प्रमाणपत्र- संख्या बताएं | उस व्यक्ति का नाम और पता जिसे विक्रय या अंतरित किया गया है। | विक्रय या अंतरण की तारीख | क्रेता के नाम पर जारी प्रमाण पत्र की विशिष्टियां | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|
| (5) | (6) | (7) | (8) | (9) |
पत्राचार की गोपनीयता - यदि कोई ऐसा संदेश जिसे एएसओसी धारक प्राप्त करने का हकदार नहीं है, तो ऐसा एएसओसी धारक इसकी विषय-वस्तु, इसके स्रोत या गंतव्य, इसकी विद्यमानता या इसकी प्राप्ति के तथ्य को किसी व्यक्ति (केंद्रीय सरकार या किसी न्यायालय द्वारा इस प्रयोजन के लिए प्राधिकृत अधिकारी से भिन्न) को नहीं बताएगा या बताने की अनुमति नहीं देगा और ऐसे एएसओसी धारक ऐसे संदेश का लिखित रूप में लिखित तैयार करने, प्रति बनाने या उपयोग नहीं करेंगे, या लिखित रूप में तैयार करने, प्रति बनाने या उपयोग करने की अनुमति नहीं देंगे।
साधारण रेडियो संचार प्रक्रिया-(1)(क) पारेषण से पूर्व, स्टेशन को यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरतेगा कि उनके उत्सर्जन के कारण पहले से चल रहे पारेषण में हस्तक्षेप न हो। यदि ऐसे किसी हस्तक्षेप की संभावना होती है तो पारेषण को तब तक शुरू नहीं किया जाएगा जब तक कि चल रहे संचार में समुचित नियंत्रण न हो।
(ख) प्रमाण-पत्र में अंकित कॉल साइन को पारेषण की प्रत्येक अवधि के आरंभ और अंत में पहचान के लिए भेजा जाएगा। जब पारेषण की अवधि दस मिनट से अधिक हो जाती है तो कॉल साइन को दोहराया जाएगा। एएसओसी धारक बिना पहचान के या गलत पहचान के साथ पारेषण नहीं करेंगे।
(ग) लम्बी कॉल और पारेषण से बचा जाएगा।
(घ) जब कॉल साइन, कतिपय अभिव्यक्तियां, कठिन शब्द, संक्षिप्ताक्षरी, आंकड़े आदि का उच्चारण करना आवश्यक हो, तो अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार अभिसमय में दिए गए ध्वन्यात्मक वर्णमाला और फिगर कोड का उपयोग किया जाएगा।
(2) कॉल और उत्तर की प्रक्रिया:
(a) कॉल में कॉल किए गए स्टेशन का कॉल साइन होगा, जो कि तीन बार से अधिक कॉल नहीं किया जाएगा; शब्द डीई (मोर्स पारेषण की दशा में) और शब्द "दिस इस" (टेलीफोनी की दशा में) कॉल करने वाले स्टेशन का कॉल साइन तीन बार से अधिक नहीं होगा।
(ख) कॉल के उत्तर में निम्नलिखित बातें शामिल होंगी- कॉल करने वाले स्टेशन का कॉल साइन, तीन बार से अधिक नहीं; शब्द डीई (मोर्स पारेषण की दशा में) और शब्द "दिस इस" (टेलीफोनी की दशा में)। कॉल किए गए स्टेशन का कॉल साइन, तीन बार से अधिक नहीं।
(ग) कॉल दो मिनट के अंतराल पर तीन बार भेजी जा सकेगी; उसके पश्चात इसे 10 मिनट के अंतराल तक दोहराया नहीं जाएगा जिसके दौरान प्रचालक उस फ्रीक्वेंसी में सुनेंगे जिस पर कॉल की गई है।
(घ) सभी स्टेशनों पर साधारण कॉल की दशा में सिग्नल 'सीक्यू' (रेडयोटेलीग्राफी की दशा में) और शब्द 'हैलो आल स्टेशन' या सिग्नल 'सीक्यू' (रेडयोटेलीफोनी की दशा में) कॉलिंग प्रक्रिया में कॉल किए गए स्टेशन के कॉल साइन का स्थान लेंगे।
(3) पारेषण और कार्य की समाप्ति:
(क) संदेश का पारेषण सिग्नल एआर (मोर्स पारेषण की दशा में) और शब्द 'ओवर' (टेलीफोनी की दशा में) द्वारा समाप्त किया जाएगा।
(ख) दो स्टेशनों के बीच कार्य की समाप्ति को उनमें से प्रत्येक द्वारा संकेत वीए (मोर्स पारेषण की दशा में) के माध्यम से और रेडयोटेलीफोनी की दशा में 'आउट' शब्द (या वीए जिसे विक्टर अल्फा बोला जाता है) द्वारा उपदर्शित किया जाएगा।
(4) परीक्षण:
(क) जब ट्रांसमीटर या रिसीवर के समायोजन या किसी प्रयोग के लिए परीक्षण संकेत बनाना आवश्यक हो तो ऐसे संकेतों को 30 सेकंड से अधिक समय तक जारी नहीं रखा जाएगा और यह वीवीवी की सीरीज से बना होगा जिसके बाद परीक्षण सिग्नल उत्सर्जित करने वाले स्टेशन का कॉल साइन होगा। रेडयोटेलीफोनी की दशा में वीवीवी की सीरीज को फिगर कोड में बोले गए 1,2,3,4... अंकों से प्रतिस्थापित किया जाएगा।
(ख) 30 सेकंड से अधिक के परीक्षण के लिए आर्टिफिशियल एरियल का उपयोग किया जाएगा।
एएसओसी धारक कैरियर वेव का उत्सर्जन नहीं करेंगे जब तक कि ऐसे कैरियर वेव इंटेलिजिवल मॉड्यूलेशन के अधीन न हो।
(1) केंद्रीय सरकार द्वारा लिखित रूप में निरीक्षण करने के लिए प्राधिकृत कोई भी अधिकारी किसी भी साधित्र की निरीक्षण, जांच या परीक्षण कर सकता है तथा निरीक्षण अधिकारी द्वारा जांच के लिए एएसओसी धारक प्रमाण पत्र, स्टेशन लॉग या अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध करवाएगा।
(2) केंद्रीय सरकार द्वारा जब एएसओसी धारक को ऐसा करने के लिए कहा जाएगा तो वह प्रमाण-पत्र, लॉग बुक या कोई अन्य अभिलेख या डाटा, केंद्रीय सरकार द्वारा जांच के लिए भेजने की व्यवस्था करेंगे।
[फा. सं. 24-09/2024-यूबीबी] देवेन्द्र कुमार राय, संयुक्त सचिव
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